सूरजपुर/प्रतापपुर:– विकासखंड अंतर्गत आदिम जाति सेवा सहकारी समिति मर्यादित दवनकरा एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। ग्राम पंचायत मटिंगड़ा सहित आसपास के गांवों के किसानों ने समिति प्रबंधन पर बिना ऋण लिए भी कर्जदार बताकर जबरन अवैध वसूली करने का आरोप लगाया है। इस संबंध में किसानों द्वारा कलेक्टर सूरजपुर के नाम ज्ञापन सौंपते हुए अनुविभागीय दण्डाधिकारी (राजस्व) प्रतापपुर के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई गई है।
किसानों का कहना है कि वे हर वर्ष समिति से केवल खाद लेते हैं, जिसकी राशि धान विक्रय के समय समायोजित कर ली जाती है। इसके बावजूद समिति द्वारा पिछला कर्ज बताकर दोहरी वसूली की जा रही है। आरोप है कि रिकॉर्ड में मनमाने ढंग से कर्ज दर्शाकर किसानों पर दबाव बनाया जा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है।
इस पूरे मामले में समिति के प्रबंधक संतोष नाविक का नाम बार-बार सामने आ रहा है। किसानों का आरोप है कि संतोष नाविक के खिलाफ यह पहला मामला नहीं है। पूर्व में भी दर्जनों किसानों ने धोखाधड़ी की शिकायत एसडीएम से लेकर कलेक्टर तक कई बार की, यहां तक कि थाना स्तर पर एफआईआर भी दर्ज हुई, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
ग्रामीणों का दावा है कि संतोष नाविक को चार से पांच बार बर्खास्त भी किया गया, लेकिन हर बार कथित रूप से मोटी लेनदेन के जरिए उसे पुनः पद पर बहाल कर दिया गया। किसानों का कहना है कि सहकारी विभाग ऐसा बन गया है, जहां कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित रह जाती है, जबकि जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी रहती है।
इतना ही नहीं, पूर्व में मुख्यमंत्री जनदर्शन में भी संतोष नाविक के खिलाफ 119 क्विंटल फर्जी धान विक्रय की शिकायत की गई थी। जिला स्तरीय जांच टीम द्वारा की गई जांच में शिकायत सही पाई गई, जिसके बाद कार्रवाई के लिए प्रकरण सरगुजा आयुक्त को भेजा गया। बावजूद इसके, आज तक उस मामले में भी कोई अंतिम कार्रवाई नहीं हो पाई है और मामला अधर में लटका हुआ है।
किसानों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि छह दिवस के भीतर संतोषजनक जांच व कार्रवाई नहीं हुई, तो वे सोसायटी एवं धान खरीदी केंद्र के पास एक दिवसीय धरना प्रदर्शन करेंगे और साथ ही भैसामुंडा–बनारस मार्ग पर चक्का जाम किया जाएगा। किसानों ने स्पष्ट किया है कि आंदोलन के लिए प्रशासन स्वयं जिम्मेदार होगा।
लगातार सामने आ रहे आरोपों और पुराने मामलों में कार्रवाई न होने से सहकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। अब देखना यह है कि प्रशासन इस बार ठोस कदम उठाता है या यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

