- भूपेश सरकार की बढ़ती लोकप्रियता से घबराकर भाजपा की मोदी सरकार ने अपनाई दमनकारी नीति-शर्मा
- सुश्री सरोज पांडे केंद्र सरकार की हिटलरशाही नीति के विरुद्ध अपने प्रदेश सहित बस्तर का पक्ष रखने का साहस दिखाए-कांग्रेस
- राज्य के मुखिया मान.भूपेश बघेल जी ने पूर्व में भी विनिवेशीकरण के विरोध में की थी नगरनार से पदयात्रा-राजीव शर्म
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जगदलपुर..
केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना करते हुए जिला कांग्रेस कमेटी के संघर्षशील युवा अध्यक्ष राजीव शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नितियों के कारण सीमा पर तैनात जवानों की जान पर बन आई वही देश के हर नागरिक की जान कोरोना की लापरवाही से खतरे में है मोदी सरकार देशवासियों की स्वास्थ्य की रक्षा के उपायों की चिंता को दरकिनार कर लगातार अपनी स्वयं की राजनीतिक ब्रांडिंग करते हुए उद्योगपति मित्रों को राजनीतिक लाभ पहुंचाने का कार्य कर रहे हैं जिसका ताजा उदाहरण नगरनार स्टील प्लांट निजीकरण है इस ज्वलन्त मुद्दे पर भाजपा नेताओं की चुप्पी समझ से परे या फिर आलाकमान के समक्ष अपना पक्ष रखने का साहस नही जुटा पा रहे है केंद्र सरकार यदि बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट को निजी लोगों के हाथों में बेचती है तो यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण होगा केंद्र सरकार के इस कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीदों और आकांक्षाओं को गहरा आघात पहुंचेगा नगरनार स्टील प्लांट का इस प्रकार के निजीकरण के समाचार से समूचे प्रदेश के साथ-साथ बस्तर वासियों को भी गहरा धक्का लगा है भारत सरकार के इस फैसले से आदिवासी समुदाय आंदोलित हो रहे हैं तथा भाजपा की केंद्र सरकार के विरुद्ध असंतोष की भावना व्याप्त हो रही है राजीव शर्मा ने कहा कि भाजपा इस बात से भलीभांति अवगत है कि राज्य शासन काफी अथक प्रयासों से नक्सल गतिविधियों पर अंकुश लगाने में सफल हुई है इन परिस्थितियों में नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण होने से नक्सलियों द्वारा आदिवासियों के असंतोष का अनुचित लाभ उठाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता नगरनार स्टील प्लांट के लिए लगभग 610 हेक्टेयर निजी जमीन अधिग्रहित की गई है जो सार्वजनिक प्रयोजन के लिए ली गई है नगरनार स्टील प्लांट में लगभग 211 हेक्टर सरकारी जमीन आज भी छत्तीसगढ़ शासन की है इसमें केवल 27 एकड़ जमीन 30 वर्षों के लिए सशर्त एनएमडीसी को दी गई है बाकी पूरी शासकीय जमीन छत्तीसगढ़ शासन के स्वामित्व की है तथा राज्य शासन ने जो जमीन उद्योग विभाग को हस्तांतरित की है उसकी पहली शर्त यही है कि उद्योग विभाग द्वारा भूमि का उपयोग केवल एनएमडीसी द्वारा ही स्टील प्लांट स्थापित किए जाने के प्रयोजन के लिए ही किया जाएगा छत्तीसगढ़ में आदिवासियों के हितों एवं उनके नैसर्गिक अधिकारों की रक्षा के लिए पेशा कानून 1996 लागू है राज्य शासन छत्तीसगढ़ के आदिवासियों के हितों की सुरक्षा के लिए सदैव कृत संकल्पित है सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों को हमारे मार्गदर्शक भारत के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय जवाहरलाल नेहरू ने आगे बढ़ाया था और इनके महत्व को देखते हुए छत्तीसगढ़ शासन हमेशा इनकी प्रगति में अपना सहयोग देगा एनएमडीसी द्वारा लगभग 20000 करो रुपए से अधिक की लागत से बस्तर स्थित निर्माणाधीन नगरनार स्टील प्लांट का निकट भविष्य में प्रारंभ होना संभावित है इस स्टील प्लांट के प्रारंभ होते ही बस्तर की बहुमूल्य खनिज संपदा का दोहन बस्तर इस्थित एनएमडीसी के नगरनार स्टील प्लांट में उपयोग से राष्ट्र निर्माण में अपनी अमिट सहयोग प्रदान होने एवं इस औद्योगिक इकाई के शुभारंभ होने से क्षेत्र में हजारों प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर उपलब्ध होने की संभावना से गौरवान्वित महसूस कर रहे थे मगर केंद्र की मोदी सरकार अपने निजी स्वार्थ के लिए औद्योगिक घराने से ताल्लुक रखने वालों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य यह कदम उठाने पर आमदा है जो बस्तर वासियों के लिए छलावा होगा अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण हुआ कि छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रस्तावित स्टील प्लांट का निजीकरण किया जाए केंद्र सरकार के इस कदम से लाखों आदिवासियों की उम्मीद और आकांक्षा को गहरा आघात पहुंचेगा केंद्र सरकार नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के निर्णय पर पुनर्विचार करें और इसे सार्वजनिक क्षेत्र के उधम के रूप में यथावत प्रारंभ कर कार्यरत रहने दें ताकि बस्तर क्षेत्र के आदिवासियों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने में आधारभूत मदद मिल सके।*
